*बाल संस्कार शिविर ‘सृजन’ का हुआ सफल समापन, बच्चों में संस्कार, ज्ञान और रचनात्मकता का हुआ विकास*

*केकड़ी 17 जून (जन तंत्र तक अपडेट -पवन राठी )*
*भारत विकास परिषद शाखा द्वारा आयोजित पांच दिवसीय बाल संस्कार शिविर ‘सृजन’ का मंगलवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 13 जून से 17 जून तक चले इस शिविर में 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं ने* *उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विविध विषयों की जानकारी प्राप्त की।*
*संस्कार संयोजिक आभा बेली ने बताया कि शिविर का उद्देश्य बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करते हुए उन्हें आधुनिक जीवन की चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाना था। पांच दिनों तक आयोजित विभिन्न सत्रों में बच्चों को सरल योग, प्राणायाम, मानसिक एकाग्रता, वाणी विकास, संस्कृत परंपराओं एवं उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बच्चों को जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक सोच के महत्व से भी अवगत कराया।*
*शिविर के दौरान बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए अनेक रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियां आयोजित की गईं। मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव, प्लास्टिक के दुरुपयोग से होने वाली पर्यावरणीय हानि, दिशा सूचक यंत्र (कम्पास) की उपयोगिता, गीता श्लोक पाठ, नैतिक शिक्षा प्रवचन तथा मिट्टी द्वारा मूर्ति निर्माण जैसी गतिविधियों ने बच्चों को नई सीख प्रदान की। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित हुई।*
*शिविर के संचालन एवं व्यवस्थाओं में संगीता चौधरी, प्रभा गर्ग, रक्षा विजय, ममता विजय, अनिता राठी, सोनाली राठी एवं आशा सैनी का विशेष योगदान रहा। सभी ने बच्चों को विभिन्न गतिविधियों में मार्गदर्शन प्रदान करते हुए शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।*
*समापन अवसर पर उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत गतिविधियों एवं उनके उत्साह की सराहना की। कार्यक्रम में सर्वेश विजय, बहादुर सिंह शक्तावत, महावीर पारीक, रामनिवास जैन, बृजराज शर्मा, रामधन प्रजापत, काशीराम विजय, विष्णु शर्मा एवं बद्री प्रसाद कछावा सहित अनेक समाजसेवी एवं अभिभावक उपस्थित रहे।*
*वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को संस्कार, नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे शिविर न केवल बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होते हैं, बल्कि उनमें सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना भी विकसित करते हैं।*
*पांच दिवसीय बाल संस्कार शिविर ‘सृजन’ के सफल आयोजन से बच्चों, अभिभावकों एवं समाजजनों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला तथा सभी ने भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।*

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