*केकड़ी 14 जून (पवन राठी )*
*जब कोई भी बीमारी दवाई से ठीक नहीं हो पाती है, तब हम भगवान के मंदिर में और साधु संतों के पास आशीर्वाद लेने जाते हैं कि हे भगवान अब तो आप ही इस बीमारी से बचा सकते हो ।*
*साधु संतों व भगवान के आशीर्वाद से रोग ठीक हो भी जाता है ।*
*तभी कहते हैं कि जहां विज्ञान समाप्त होता है वहीं से आध्यात्म प्रारंभ होता है।*
*उन्होंने बताया कि साधु संतों को आहार देने के बाद शेष अन्न महा औषधि का काम करती है, जिस तरह भगवान को लगाया गया भोग ,प्रसाद बन जाता है।*
*मानव अपने शरीर को सुंदर दिखाने के लिए मृत जानवरों से प्राप्त चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग करता है, अगर वह व्यक्ति प्रभु की भक्ति करें तो बिना बाह्य सामग्री के ही उसके शरीर में निखार आ जाता है और वह सौंदर्य से परिपूर्ण हो सकता है ।*
*बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ मंदिर परिसर में आयोजित धर्म सभा में अपने प्रवचन के दौरान श्रवण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे ।*
*संघस्थ मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने भक्तामर स्तोत्र का गुणानुवाद करते हुए कहा कि भक्तामर स्तोत्र आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा रचित स्तोत्र विघ्न विनाशक स्तुति है जिसे जीवन में कभी भी कष्ट आ जाने पर इस स्तोत्र के स्मरण, स्तवन करने से संकट दूर हो जाते हैं ।*
*तीन लोक के अधिपति देवों के देव भी इस स्तुति को सुनकर प्रफुल्लित होते हैं ।*
*प्रातः जिनाभिषेक,शांति धारा, जिनेंद्रअर्चना सहित सभी धार्मिक क्रियाएं मुनि ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुई ।*
*नेमीनाथ मंदिर समाज के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश चंद्र जैन मावा वालों ने बताया कि दोपहर में रायणसार ग्रंथ का मुनि द्वारा व्याख्यान किया गया ।*
*शाम को आरती ,भक्ति, शास्त्र सभा ,स्वाध्याय सहित आनंद यात्रा संपन्न हुई ।*
*श्रीजी के प्रथम स्वर्ण कलश करने का सौभाग्य टीकमचंद विपिन कुमार रामथला परिवार ने प्राप्त किया ।*
*शांति धारा का पुण्यार्जन बलवंत कुमार नितिन कुमार उदयपुर वाले ,औरंगाबाद ने प्राप्त किया ।*




