*मानव जीवन में हमें हमेसा धर्मकार्य में अग्रसर रहना चाहिए।*

*धर्मकार्य के अंतर्गत श्रावकों को अपने धन का सदुपयोग बहुत से परोपकार्य के अतिरिक्त  जिन बिम्ब,मन्दिर निर्माण,धर्म के प्रचार प्रसार में भी लगाकर अपनी धार्मिक संस्कृति की रक्षा करते हुए सुपथ पर चलकर पुण्य का बंध करना चाहिए ।*
*अपने जीवन में कभी भी* *देव-शास्त्र,गुर और माता पिता का अनादर नहीं करना चाहिए।*

*केकड़ी 13 जून (पवन राठी -जनतन्त्र तक अपडेट के लिए )*
*बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ मंदिर में श्रमण मुनि श्री प्रज्ञान सागर महाराज आयोजित धर्म सभा में अपने प्रवचन के दौरान कहे।*
*संघस्थ मुनिश्री प्रसिद्ध सागर महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के गुणानुवाद स्वरूप बताये कि जिन भगवान अष्ट प्रतिहार्य से युक्त होते है।*
*अशोक वृक्ष के नीचे  भगवान विराजमान होने से  उस वृक्ष की शोभा बढ़ जाती है वैसे ही प्रभु की कृपा होने से से हमारी आत्मा शोभायमान होती है।*
*प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा जिनेन्द्रअर्चना सहित धार्मिक क्रियाएँ ससंघ के सानिध्य में सम्पन्न हुई ।*
*दोपहर में मुनि श्री ने श्रावकों को धार्मिक व्याख्यान से लाभान्वित किया।*
*शाम को आरती, भक्ति, शास्त्र स्वाध्याय सहित आनंद यात्रा यात्रा समपन्न हुई।*
*श्री जी का प्रथम स्वर्ण कलश भाग चंद ज्ञान चंद जैन कुमार विनय कुमार भगत व शांतिधारा का सौभाग्य  रामपाल कैलाश  चंद राजेन्द्र कुमार नासिरदा परिवार ने प्राप्त किया।*

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