*मानस योग साधना शिविर का शुभारंभ, तप-सेवा-सुमिरन के सूत्रों पर हुआ मंथन*

केकड़ी 13 जून (पवन राठी -जनतन्त्र तक अपडेट के लिए )*
*बढ़ते कदम संस्थान द्वारा तप सेवा सुमिरन समिति के तत्वावधान में कटारिया ग्रीन में आयोजित सात दिवसीय मानस योग साधना आधारित आध्यात्म एवं स्वास्थ्य विकास शिविर का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। उद्घाटन समारोह में केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम मुख्य अतिथि रहे, जबकि सत्संस्कार समिति के संरक्षक रामनारायण करवा, उद्यमी बिरदीचंद नुवाल तथा पूरण करिहा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।*
*शिविर में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर साइंटिफिक स्पिरिचुअलिज्म (आईएएसएस), मेरठ के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य चेतना संवाहक एवं मानस मर्मज्ञ डॉ. गोपाल शास्त्री ने साधकों को तप, सेवा और सुमिरन के त्रिआयामी सिद्धांतों की विस्तार से व्याख्या करते हुए जीवन में उनके महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती द्वारा भगवान शिव से पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में शिव ने कहा था कि प्रत्येक जीव में ईश्वर का वास होने के बावजूद दुःख का कारण सृष्टि के शाश्वत नियमों की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि संसार में प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होना प्रकृति का अटल नियम है और मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।*
*डॉ. शास्त्री ने कहा कि सत्संग के माध्यम से बुद्धि और विवेक का जागरण होता है। विवेक जागृत होने पर व्यक्ति सही और गलत, हितकारी और अहितकारी के बीच अंतर समझने लगता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार हंस के लिए नीर-क्षीर विवेक की उपमा दी जाती है, उसी प्रकार सत्संग से मनुष्य में भी गुण-दोष की पहचान करने की योग्यता विकसित होती है।*
*उन्होंने कौवे और कोयल का उदाहरण देते हुए कहा कि न तो कौवा किसी से कुछ लेता है और न ही कोयल किसी को कुछ देती है, फिर भी कोयल अपनी मधुर वाणी के कारण सभी को प्रिय लगती है।* *इसलिए मनुष्य को भी अपने व्यवहार और वाणी को मधुर बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसमें केवल गुण ही हों और कोई दोष न हो। अतः दूसरों के दोषों पर ध्यान देने के बजाय उनके गुणों को ग्रहण करने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए। यही दृष्टिकोण जीवन में सुख, शांति और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।*
*शिविर में रामचरितमानस में निहित स्वास्थ्य, साधना और आनंदमय जीवन के सूत्रों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। योग, ध्यान, प्राणायाम, आत्मानुशासन, मानसिक एकाग्रता तथा सकारात्मक जीवनशैली के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन दिया गया। डॉ. शास्त्री ने साधकों को अपनी आय का दशांश लोककल्याण एवं सेवा कार्यों में लगाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि स्वास्थ्य, शक्ति और आनंद की प्राप्ति सेवा भाव तथा आत्मानुशासन से संभव है।*
*आयोजन समिति के अनुसार शिविर 18 जून तक प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक संचालित होगा।* *शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए साधक भाग ले रहे हैं। 13 एवं 14 जून को आईएएसएस की आध्यात्मिक प्रमुख डॉ. श्यामा दीदी विशेष ध्यान एवं आध्यात्मिक सत्रों का संचालन करेंगी।*
*शिविर के सफल संचालन में यज्ञनारायण सिंह, आनंद सोमाणी, महेंद्र प्रधान, अमित गर्ग, बुद्धि प्रकाश दाधीच, मधुलिका दाधीच, महेश शर्मा, रामगोपाल सैनी, मुकेश नुवाल, कैलाश जैन एवं दिनेश वैष्णव सहित अनेक कार्यकर्ता सेवाएं दे रहे हैं।*

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