*238 किलो अफीम कांड में  CBN(सेंट्रल ब्यूरो आफ नारकोटिक्स )का  चेहरा बेनकाब, सब-इंस्पेक्टर बरी, असली तस्करों को 17-17 साल की जेल!*

*नीमच! केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के इतिहास के सबसे बड़े अफीम केस में कोर्ट का वो ऐतिहासिक फैसला आया है, जिसने जांच एजेंसियों को सोचने पर मजबूर कर दिया ! जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा के पास एक ट्रेलर से बरामद हुई 238 किलो अफीम के जिस मामले में राजस्थान पुलिस के सब-इंस्पेक्टर मोहनलाल भादू को ‘मास्टरमाइंड’ बताकर जेल में सड़ाया जा रहा था, कोर्ट में वो पूरा ताना-बाना ताश के पत्तों की तरह ढह गया।*
*मादक पदार्थ मामलों के सुपर-एक्सपर्ट और नीमच के वरिष्ठ वकील मनीष जोशी की ऐसी ‘घातक’ पैरवी चली कि माननीय अदालत ने सब-इंस्पेक्टर मोहनलाल भादू को साफ-साफ दोषमुक्त (बरी) कर दिया, जबकि मौके से पकड़े गए तीन बड़े तस्करों को 17-17 साल की कठोर सजा और भारी जुर्माने से डस लिया!*
*मामा-भांजे का रिश्ता… और CBN की ‘व्हाट्सएप थ्योरी’ फुस्स:-*
*मामला साल 2022 का है। सीबीएन ने हाईवे पर नाकाबंदी कर भारी मात्रा में अफीम पकड़ी थी। मौके से सुखराम, हेतराम विश्नोई और जगदीश सियाग को दबोचा गया। लेकिन सीबीएन ने असली खेल तब खेला, जब जोधपुर के ‘माता का थान’ थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मोहनलाल भादू (निवासी: बरजासर, फलोदी) को मुख्य आरोपी बना दिया।*

*गुनाह क्या था?*
*सिर्फ ये कि आरोपी सुखराम रिश्ते में सब-इंस्पेक्टर का भांजा था और दोनों के बीच व्हाट्सएप कॉल पर बात हुई थी! सीबीएन ने इसी को ढाल बनाकर एक वर्दीवाले की जिंदगी तबाह करने की स्क्रिप्ट लिख डाली।*

*अदालत में एडवोकेट मनीष जोशी का ‘रुद्र रूप’, ऐसे खोली CBN की पोल:-*
*जब सब-इंस्पेक्टर के बेकसूर परिजनों ने नीमच अभिभाषक संघ के अध्यक्ष व दिग्गज वकील मनीष जोशी से गुहार लगाई, तो कोर्ट रूम एक जंग का मैदान बन गया। एडवोकेट मनीष जोशी ने जिरह (क्रॉस एग्जामिनेशन) के दौरान सीबीएन के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करके ऐसे तीखे सवाल दागे कि पूरी कहानी साबित नहीं हो पाई!*

*सवाल नंबर 1: –*
*अफीम आसमान से टपकी या पाताल से?*
*सीबीएन ने कह दिया कि अफीम ‘मणिपुर’ से आई थी। एडवोकेट जोशी ने तंज कसा—”मणिपुर एक पूरा राज्य है, कोई एक दुकान नहीं! सीबीएन सटीक जगह क्यों नहीं बता पाई?*

*सवाल नंबर 2: –*
*मोबाइल गायब, सबूत गायब! सीबीएन ने व्हाट्सएप कॉल का रोना रोया, लेकिन जब एडवोकेट जोशी ने पूछा कि सब-इंस्पेक्टर के मोबाइल की जब्ती और उसकी फॉरेंसिक/तकनीकी साक्ष्य कहां है? तो सीबीएन बगले झांकने लगा। कोर्ट में कोई तकनीकी सबूत टिक ही नहीं पाया!*
*सवाल नंबर 3: –*
*एक्सीडेंट की मनगढ़ंत कहानी! सीबीएन के अफसरों ने सहानुभूति बटोरने के लिए कहा कि तस्करों ने उनकी गाड़ी को टक्कर मारी थी, लेकिन कोर्ट में जब पुलिस डायरी और सरकारी दस्तावेज खंगाले गए, तो इस कथित एक्सीडेंट का कोई नामोनिशान ही नहीं था!*

*2 साल का नरक… और अब आँखों में इंसाफ के आंसू:-*
*सीबीएन के इस खोखले केस की वजह से सब-इंस्पेक्टर मोहनलाल भादू पिछले दो साल से नीमच की कनावटी जेल की सलाखों के पीछे अपनी बेगुनाही की जंग लड़ रहे थे। एक फर्जी केस ने राजस्थान पुलिस के जांबाज अफसर का करियर और जिंदगी दांव पर लगा दी थी। लेकिन जैसे ही कोर्ट ने बाइज्जत बरी करने का हुक्म सुनाया, कोर्ट परिसर में मौजूद परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।*

*तीन तस्करों को 17-17 साल का कारावास:-*
*एक तरफ जहां बेकसूर सब-इंस्पेक्टर को नया जीवन मिला, वहीं कोर्ट ने नशे के सौदागरों पर कोई रहम नहीं दिखाया। मौके से गिरफ्तार तस्कर सुखराम (निवासी केरला, जोधपुर), हेतराम विश्नोई और जगदीश सियाग (निवासी फलोदी) के खिलाफ गुनाह साबित होने पर एनडीपीएस (NDPS) की विशेष अदालत ने तीनों को 17-17 साल की जेल की सजा सुनाकर जेल की काल कोठरी में भेज दिया है!*

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