मानव को अपने कर्म के क्षय के लिए दान एवं पूजा अवश्य करना चाहिए। दान चार प्रकार से किये जा सकते है इसमें अवश्य सहभागिता होनी चाहिए।*

औषध दान, शास्त्रदान, आहार दान एवं अभयदान*
*इसमें आहार दान महादान एवं दरिद्र नाशक होता है ।*

केकड़ी 9 जून (पवन राठी )*
*बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ मंदिर में विराजित श्रमण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने मंदिर परिसर में आयोजित धर्म सभा में अपने धर्मापोदेश में कहे, उन्होने कहा कि लाखों लोगों को भोजन कराना और  साधु सन्यासी को आहार दान देने से अनन्त पुण्य का फल मिलता है। *आहार दान करने पर. मानव अपने आपको धन्य मानता है क्यो कि दिगम्बर-साधु को आहार  कराने का सौभाग्य पुण्य होने पर ही प्राप्त कर सकता है।*
*संघस्थ मुनि श्री प्रसिद्ध सागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रभु की स्तुति, भक्ति इतनी अचिन्तनीय होती है कि भगवान की भक्ति से भक्त भी भगवान बन सकता है।*
*भक्तामर स्तोत्र के गुणानुवाद के द्वारा भक्त को क्षमा करने वाले स्तोत्र के द्वारा कर्म निर्जरा से अपने पुण्य का सदमार्ग बताया गया।*
*प्रातः जिनोभिषेक, शांतिधारा जिनेन्द्रअर्चना मुनिसंघ के सानिध्य में हुए ।*
*मध्यान्ह में आचार्य कुन्द कुन्द  स्वामी द्वारा रचित रमण सार ग्रंथ का स्वाध्याय मुनिश्री द्वारा वर्णन सहित अनुवाद किया गया।*
*शाम को आरती,स्वाध्याय व आनदयात्रा भक्तिभाव के साथ संपन्न किये गए ।*
*मुनि श्री को आज का आहारदान आनंद आहार ग्रुप  द्वारा दिया गया ।*
*संयोजिका लक्ष्मी जैन व मंडल की महिलाओं ने आहारदान में सहयोग कियाl*

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