*केकड़ी 03 मई (पवन राठी )*
*युवा साहित्यकार करन सिंह राठौड़ (हिंगोनियां) द्वारा रचित प्रथम काव्य संग्रह ‘तुझसे मिलना है ज़िंदगी’ का रविवार को भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि विधायक शत्रुघ्न गौतम, कवि अशोक चारण, साहित्यकार विमला नागला एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के करकमलों द्वारा पुस्तक का लोकार्पण किया गया।*
*लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान साहित्य के क्षेत्र से जुड़ी प्रतिभाओं का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर विधायक शत्रुघ्न गौतम ने रचनाकार करन सिंह राठौड़ एवं उनके परिवार को बधाई देते हुए कहा कि आज के समय में लोग जीवन को जीने की बजाय केवल उसे बिताने में लगे हैं, जबकि इस पुस्तक में जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने सभी से इस पुस्तक को ध्यानपूर्वक पढ़ने का आग्रह किया।*
*साहित्यकार विमला नागला ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि करन सिंह ने अपनी रचनाओं में जीवन को सार्थक रूप से जीने का संदेश दिया है, जो संवेदनाओं से ओतप्रोत है। कवि अशोक चारण ने भी पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कृति जीवन के कई अनछुए पहलुओं को उजागर करती है।* *उन्होंने करन सिंह को प्रेरित करते हुए कहा कि कवि बनना महत्वपूर्ण है, लेकिन कवि बने रहना उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण है।*
*पुस्तक के लेखक करन सिंह राठौड़ ने अपनी रचनात्मक यात्रा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने समाज में देखे गए अनुभवों को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है। इस अवसर पर राजपूत समाज की ओर से भंवर सिंह राठौड़ ने कहा कि करन सिंह ने यह पुस्तक लिखकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र और समाज को गौरवान्वित किया है।*
*कवि देवकरण मेघवंशी ने भी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। हिन्दी प्रोफेसर आनन्द पाराशर ने कहा कि करन सिंह की रचनाओं में उदासी का अत्यंत सुंदर चित्रण है। उन्होंने विशेष रूप से ‘तुम गाँव का रास्ता कैसे भूल गए’ कविता का उल्लेख करते हुए उसमें अपनों को खोने के दर्द की मार्मिक अभिव्यक्ति की सराहना की।*
*इस दौरान लक्ष्मण सिंह राठौड़, जसवंत सिंह डोराई, बहादुर सिंह, महेन्द्र सिंह ढोस, होनहार सिंह राठौड़, पृथ्वीराज सिंह, भूपेंद्र सिंह सावर, भंवर सिंह राठौड़, गोपाल सिंह कादेड़ा, अंबिका चरण सिंह, भगवत सिंह गोयला, रामेश्वर शर्मा, महावीर प्रसाद धाकड़, सत्यनारायण गुर्जर, गिरधारी चौधरी, धनराज चौधरी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से सैकड़ों लोगों ने भागीदारी निभाई।*
*कार्यक्रम का संचालन रणजीत सिंह केशावत एवं प्रभुलाल बादल ने किया। अंत में करन सिंह के पिता नारायण सिंह राठौड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।*











